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दिव्य प्रेम की लहर - मास्टर बेइंसा डूनो (पीटर ड्यूनोव) (शाकाहारी) द्वारा व्याख्यान, 2 का भाग 2

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पुराने का उन्मूलन (1944)

“प्राणीओं जो ऊपर से अवतरित होते हैं वे कहते हैं, 'हम पृथ्वी को उलट देंगे और इसमें से बुराई को भगा देंगे।'” बुराई फिर कभी आपके बीच आने का प्रयास नहीं करेगी।

आज जो भीषण विनाश हो रहा है,वह इसी महान जीवन के कारण है, जो अब आ रहा है। यदि लोग स्वेच्छा से मसीह को स्वीकार नहीं करते हैं, तो आधुनिक संस्कृति सात बार अग्नि से गुजरेगी, लेकिन अंत में, यह शुद्ध और नवीनीकृत हो जाएगी। यह अग्नि की लहर सभी लोगों के मन से होकर गुजरेगी। आप सभी इस दिव्य अग्नि से गुजरेंगे; आप अपनी आत्माओं को मुक्त करोगे और बंधनों से छुटकारा पाओगे।

यदि लोग जागृत होकर उठ खड़े नहीं होते, तो वे सभी 'आवरणों' जिनमें वे लिपटे हुए हैं, जल जाएंगे। मनुष्य द्वारा बनाई गई हर चीज जलकर राख और धूल में बदल जाएगी। मैं जिस विषय पर बात कर रहा हूँ वह प्रभु के दिन का आगमन है। मैं अब कहता हूँ: हम प्रभु के दिन में हैं!

आखिरी ट्रेन के रवाना होने में केवल आधा घंटा शेष है। धिक्कार है उन लोगों का जिन्होंने अभी तक अपने हिसाब-किताब को निपटाया नहीं है। यदि यूरोप अपनी पिछली गलतियों को नहीं सुधारता है, तो वहां बड़ी विपत्तियों आयेगी। प्रभु आ रहे हैं, और उन्होंने पृथ्वी पर अपना कदम रख दिया है। मैं आसानी से साबित कर सकता हूँ कि उन्होंने पृथ्वी पर अपना कदम रखा है। कैसे? भीषण पिड़ाएं, जो निरंतर बढ़ती रहती है, इस बात का प्रमाण है कि प्रभु इस संसार में आ रहे हैं। क्या आपको पता है कि उनका फैसला क्या है? हर अशुद्ध चीज को जलना है। पृथ्वी पर उठने वाली धूल का ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा गया। आपने कभी सोचा भी नहीं होगा कि महान उस दिन से पहले किस तरह की बड़ी शुद्धि होने वाली है। यूरोपीय राष्ट्रों और यूरोपीय राजनयिकों की योजनाओं का कुछ भी शेष नहीं बचेगा। प्रेम हर पुरानी चीज को नष्ट कर देता है। उनके बाद, हम निर्माण कार्य शुरू करेंगे।

समाजों में व्याप्त यह उथल-पुथल, संकट में फंसे लोगों में व्याप्त यह अशांति, इस बात का संकेत देती है कि ईश्वर हर चीज में व्याप्त है। यह सब मानव जाति के हजारों वर्षों से संचित कर्मों के उन्मूलन से जुड़ा हुआ है। जब तक सभी पुरानी अवधारणाएं, विचार और भावनाएं दुख की अग्नि में जलकर भस्म नहीं हो जातीं, तब तक मनुष्य नए जीवन में प्रवेश नहीं कर सकता, जो अब आने वाला है।

हजारों वर्षों से हम नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव में रहे हैं, इसीलिए अब ये शक्तियां हमारे खिलाफ हो गई हैं। लोग सही रास्ते से भटक गए हैं, और सभी दुर्भाग्यों इसी के कारण हैं। वे कई चीजों से भटक गए हैं और इसी कारण से, विकास में पिछड़ गए हैं। अदृश्य दुनिया उनकी मदद करना चाहती है ताकि वे ठीक से विकसित हो सकें। अदृश्य दुनिया लोगों के घरों पर काम करने के लिए हथौड़ों के साथ कार्यकर्ताओं को भेज रही है। इन विपत्तियों को 'जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियाँ' कहा जाता है। अपनी अविवेकी जीवनशैली के कारण लोग बुराई को पनपने देते हैं, और परिणामस्वरूप विपत्तियाँ आती हैं।

आज हम जो अनुभव करते हैं और हमारे पर कुछ भारी लटकता महसूस करते हैं, वह हमारे अपने कर्मों का फल है। यह एक ऐसा ऋण है जिसका भुगतान करना अनिवार्य है। मैथ्यू अध्याय 24 में, जिस महिला को 'ले जाया गया' था, उन्होंने अपने कर्मों का फल भुगत लिया है; वह किसी भी कर्ज से मुक्त है। दूसरी ओर, जिस महिला को 'छोड़ दिया गया' है, उन्होंने अभी तक अपने कर्मों का फल नहीं मिटाया है। और इसलिए, वर्तमान घटनाएँ एक पुराने ऋण के भुगतान, कर्म के उन्मूलन का संकेत देती हैं। वर्तमान में मानव जाति की पिछली गलतियों को दूर करने की प्रक्रिया में तेजी आ रही है। जो कुछ भी संचित हुआ है, उन्हें नष्ट किया जा रहा है। शरद ऋतु में, सभी पुराने पत्ते अपनी इच्छा से या अनिच्छा से ही गिर जाते हैं। पेड़ों पर केवल वही कलियाँ बची हैं जिनसे आने वाली वसंत ऋतु में नई शाखाएँ, पत्तियाँ और फूल निकलेंगे। जीवन की सुंदरता परिवर्तनों में ही निहित है। आपफान के बाद मौसम साफ हो जाता है। वर्तमान घटनाएँ एक आपफान की तरह हैं: ये गुजर जाएँगी। जो कुछ भी होता है, अच्छे के लिए ही होता है। हम सोचते हैं कि वर्तमान व्यवस्था अच्छी है, फिर भी लोगों द्वारा किए गए पापों से ईश्वर तंग आ चुका है।

यूरोपीय देशों के कर्मों का फल अब पक चुका है और यह पूरी मानवता के लिए पीड़ा का कारण बन रहा है। ये विपत्तियाँ दर्शाती हैं कि लोगों को अपने जीवन जीने के तरीके में बदलाव लाने और ईश्वरीय शिक्षाओं को अपनाने की आवश्यकता है। […] ईसाई राष्ट्रों ने मसीह की शिक्षाओं को नहीं अपनाया और इसी कारण वर्तमान विपत्तियाँ उत्पन्न हुईं। संकट के दिन आने वाले हैं क्योंकि लोगों ने स्वेच्छा से और जागृत चेतना के साथ ईश्वर की इच्छा की पूर्ति को स्वीकार नहीं किया। ये संकट के दिन आ चुके हैं। लोगों को जागृत करने और ईश्वर की इच्छा को पूरा करने, ईश्वर की सेवा करने के लिए, बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की और भी बड़ी अशांतियाँ आएंगी। यह मानवजाति पर थोपा जाएगा।[...]

एक अन्य अवसर पर ईस गुरु ने कहा: इस समय पूरी पृथ्वी एक बड़े परिवर्तन, एक पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रही है। यह तब तक जारी रहेगा जब तक इसकी शक्तियां संतुलित नहीं हो जातीं। पृथ्वी में हलचलें होंगी। ऐसे तरीके मौजूद हैं जिनसे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि पृथ्वी के किस क्षेत्र में सबसे अधिक अशांति उत्पन्न होगी।

पूरा यूरोप उथल-पुथल में है। पूरी दुनिया में अफरा-तफरी मची हुई है। डरना नहीं है। ऐसे संकट के समय में ही, लोग ईश्वर को जान पाएंगे। वे यह समझ जाएंगे कि वह सर्वज्ञानी शक्ति है जो सभी चीजों को अच्छाई में बदल देती है। आपको शांत और संयमित रहना चाहिए और यह जानना चाहिए कि आप जिस समय में जी रहे हैं वह आपके लिए सबसे उचित है। पूरे यूरोप को अकल्पनीय चुनौतियों से गुजरना पड़ेगा। आधुनिक यूरोपियों ने नदी पर एक बांध बनाया है जो एक दिन ढह जाएगा। इसलिए, जो कोई भी शहर से ऊपर है उन्हें पहाड़ों में शरण लेनी चाहिए, और जो कोई भी निचले स्तर पर है उन्हें ऊँची भूमि की ओर भाग जाना चाहिए। मैं प्रतीकात्मक रूप से बोल रहा हूँ।

लोग पूछते हैं कि भविष्य में उनका क्या होगा। कल्पना कीजिए कि आप उत्तरी ध्रुव पर रहते हैं, जहाँ सब कुछ बर्फ से ढका हुआ है। आपके घर बर्फ के बने हैं; आपको कहीं भी पानी दिखाई नहीं देता। मैं आपसे कहता हूं कि आपको कुछ एहतियाती उपाय करने की जरूरत है क्योंकि पृथ्वी में बड़े बदलाव होंगे। सूरज बहुत तेज चमकने लगेगा। इससे बर्फ पिघल जाएगी, घर ढह जाएंगे और आप डूबने लगेंगे। आप कहते हैं, "हम पर कितना बुरा भाग्य आ पड़ा है।" यह दुर्भाग्य नहीं है; बर्फ बस पिघल जाती है। मैं अब आपसे भी यही कहता हूं: यदि आप अपने जीवन को नहीं सुधारेंगे, तो आपके साथ भी वही होगा। मैं यह बात आपको डराने के लिए नहीं कह रहा हूँ। यह जीवन का स्वाभाविक क्रम है। अब जो विशाल लहर आ रही है, वह बर्फ को तोड़कर उन्हें पानी में बदल देती है। विश्व में यह भव्य सर्वज्ञानी तरंग है जो पहले से ही निकट आ रही है।

इन घटनाओं के बाद, मानवीय अहंकार समाप्त हो जाएगा, और लोग स्वतंत्र रूप से और भाईचारे के साथ रहना शुरू कर देंगे। अब समय आ गया है कि सभी लोग जीवन जीने के पुराने तरीके को त्याग दें।

जिस ईश्वर के बारे में मैं तुमसे बात कर रहा हूँ, वह पृथ्वी को हिला देगा। तभी आपको समझ आएगा कि मैं जो बोल रहा हूं सच है या नहीं। धर्मग्रंथ कहता है कि ईश्वर पृथ्वी को हिला देगा और प्रत्येक जीवित प्राणी को यह अहसास होगा कि न्याय, सत्य, सद्गुण, प्रेम और ज्ञान का अस्तित्व है। दुनिया भर के सभी लोगों को यह जानने की जरूरत है कि ईश्वर इस दुनिया में मौजूद है — और लोग यह जान लेंगे।"
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